Ai Jindgi Ruk Mat

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Bol "काव्य संग्रह के विषय में ज़िन्दगी की पगडंडियों से गुजरते हुए अपने शिक्षिका जीवन, सामाजिक और पारिवारिक अनुभवों को 'इन कविताओं की पंक्तियों ' में समेटने की एक छोटी सी कोशिश है । जिंदगी में बहुत सी परेशानियाँ आती हैं । जिनका सामना कर हम आगे बढ़ते हैं । जिंदगी से बहुत उम्मीदें होती हैं । जो पूरे हो चाहे न हो हमें भरोसा बनाए रखना होगा । विश्वास पर ही दुनिया कायम है । हमें अपने विश्वास को यकीन में बदलना होगा । सूर्य की आराधना से बहुत शक्ति और सीख मिलती है । इन सब बातों को काव्य की पंक्तियों बाँधा है मैंने । कोरोना काल में सबकी जिंदगी किन कठिन पड़ावों से गुजरी । कितनो को दूसरा जन्म मिला । कोरोना काल में ही मैंने अपनी लेखनी को आगे बढ़ाया । कठिनाइयाँ कितनी भी आ जाए हमें अपनी जिंदगी को रुकने नहीं देना है । काव्य की पंक्तियों में जिंदगी को न रुकने की गुजारिश की गई है । अनबोलते प्राणी पशु - पक्षी, पेड़ - पौधे सभी को अपने जीवन जीने का समान अधिकार है । ये अनबोलते प्राणी हमारी बहुत मदद करते हैं । फूलों की जिंदगी से हमें हँसकर जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए । किस प्रकार वे अपने दुखों को समेट कर खुशबू फैलातें हैं । हमें भी उनकी हिफाजत तथा सम्मान करना चाहिए । इनको मैंने शब्द रूपी फूलों के द्वारा काव्य रूपी माला पिरोने की कोशिश की है । उम्मीद है पाठको प्रयत्न और चाह से बनी कविताओं की माला यानी मेरी काव्य संग्रह "" ऐ ज़िन्दगी रुक मत "" आपको पसंद आएगी। ईश्वर तथा प्रिय पाठकों की शुभकामनाओं की प्रार्थी । पद्मा वर्मा (नीमा) लिटरेरी कर्नल पुणे

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"काव्य संग्रह के विषय में ज़िन्दगी की पगडंडियों से गुजरते हुए अपने शिक्षिका जीवन, सामाजिक और पारिवारिक अनुभवों को 'इन कविताओं की पंक्तियों ' में समेटने की एक छोटी सी कोशिश है । जिंदगी में बहुत सी परेशानियाँ आती हैं । जिनका सामना कर हम आगे बढ़ते हैं । जिंदगी से बहुत उम्मीदें होती हैं । जो पूरे हो चाहे न हो हमें भरोसा बनाए रखना होगा । विश्वास पर ही दुनिया कायम है । हमें अपने विश्वास को यकीन में बदलना होगा । सूर्य की आराधना से बहुत शक्ति और सीख मिलती है । इन सब बातों को काव्य की पंक्तियों बाँधा है मैंने । कोरोना काल में सबकी जिंदगी किन कठिन पड़ावों से गुजरी । कितनो को दूसरा जन्म मिला । कोरोना काल में ही मैंने अपनी लेखनी को आगे बढ़ाया । कठिनाइयाँ कितनी भी आ जाए हमें अपनी जिंदगी को रुकने नहीं देना है । काव्य की पंक्तियों में जिंदगी को न रुकने की गुजारिश की गई है । अनबोलते प्राणी पशु - पक्षी, पेड़ - पौधे सभी को अपने जीवन जीने का समान अधिकार है । ये अनबोलते प्राणी हमारी बहुत मदद करते हैं । फूलों की जिंदगी से हमें हँसकर जीवन जीने का तरीका सीखना चाहिए । किस प्रकार वे अपने दुखों को समेट कर खुशबू फैलातें हैं । हमें भी उनकी हिफाजत तथा सम्मान करना चाहिए । इनको मैंने शब्द रूपी फूलों के द्वारा काव्य रूपी माला पिरोने की कोशिश की है । उम्मीद है पाठको प्रयत्न और चाह से बनी कविताओं की माला यानी मेरी काव्य संग्रह "" ऐ ज़िन्दगी रुक मत "" आपको पसंद आएगी। ईश्वर तथा प्रिय पाठकों की शुभकामनाओं की प्रार्थी । पद्मा वर्मा (नीमा) लिटरेरी कर्नल पुणे


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  • 9789355358592
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