1 Sahity Ki Diary
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‘साहित्य की डायरी’ के लेखक व्यंग्यऋषि डॉ. भगवानस्वरूप चैतन्य हिन्दी साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित साहित्य-विभूति हैं। आपने देश-देशान्तर में भ्रमण कर अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य समारोहों में शिरकत की है। एक अप्रतिम साहित्य सेवी के रूप में देश में आपकी पृथक पहचान है। आप न केवल एक प्रखर लेखक-पत्रकार एवं कवि हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के एक ओजस्वी वक्ता एवं मनीषी शिक्षाविद हैं। आप दैनिक नई दुनिया (ग्वालियर) के संस्थापक संपादक (साहित्य) एवं स्तंभकार रह चुके हैं। आजकल म.प्र. जन संपर्क के राज्यस्तरीय स्वतंत्र अधिमान्य पत्रकार हैं। विगत 14 वर्षों से आप ग्वालियर से रजिस्टर्ड राष्ट्रीय साहित्य पत्रिका ”लोकमंगल“ का निरंतर-नियमित संपादन कर रहे हैं। आधी शताब्दी तक को लेखक के रूप में आपकी यायावर जिन्दगी की यादों के इस दर्पण में डॉ. चैतन्य के अनमोल स्मृतिलेख एवं संस्मरण शामिल हैं।
‘साहित्य की डायरी’ के लेखक व्यंग्यऋषि डॉ. भगवानस्वरूप चैतन्य हिन्दी साहित्य जगत की एक प्रतिष्ठित साहित्य-विभूति हैं। आपने देश-देशान्तर में भ्रमण कर अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य समारोहों में शिरकत की है। एक अप्रतिम साहित्य सेवी के रूप में देश में आपकी पृथक पहचान है। आप न केवल एक प्रखर लेखक-पत्रकार एवं कवि हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर के एक ओजस्वी वक्ता एवं मनीषी शिक्षाविद हैं। आप दैनिक नई दुनिया (ग्वालियर) के संस्थापक संपादक (साहित्य) एवं स्तंभकार रह चुके हैं। आजकल म.प्र. जन संपर्क के राज्यस्तरीय स्वतंत्र अधिमान्य पत्रकार हैं। विगत 14 वर्षों से आप ग्वालियर से रजिस्टर्ड राष्ट्रीय साहित्य पत्रिका ”लोकमंगल“ का निरंतर-नियमित संपादन कर रहे हैं। आधी शताब्दी तक को लेखक के रूप में आपकी यायावर जिन्दगी की यादों के इस दर्पण में डॉ. चैतन्य के अनमोल स्मृतिलेख एवं संस्मरण शामिल हैं।
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