Ajnabi
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"दस्तक" इनकी पहली किताब है, जो कि एक काव्य संग्रह है और पाठकों से इस किताब को खूब प्रशंसा मिली है, इस किताब के बाद इन्हें एक युवा लेखक के रूप में पहचान मिली, इनकी किताब "दस्तक" को कई अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं। कविताओं के बाद कहानी लेखन में "अजनबी" इनका पहला प्रयास है। अपने पेशे के साथ साथ कुछ अलग करने की चाहत इनको हमेशा से रही है, इसलिए आज अपने समय का सदुपयोग करते हूए कई क्षेत्रों में कुछ नया करने की कोशिश में लगे ही रहते हैं। अपने जीवन के इस पथ पर, इनको बहुत सारी कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा है, पर इन्होने कभी हार नही मानी, कभी टूटे नही और कभी रूके भी नही, हर बार ये कठिनाइयों का सामना कर, हौसलो के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहे और इन्होने आज अपना एक मुकाम हासिल किया, आज ये युवाओं के एक प्रेरणास्त्रोत हैं, इसलिये इन्हे प्रेरणा मंच के द्वारा प्रेरणा के पुष्प-2019 से नवाजा गया है। ये बचपन से ही उर्जावान, संस्कारी, भावुक और चंचल प्रवृत्ति के हैं, जब भी इन्हे अपने काम के बाद खाली समय मिलता है, तो अपने समय का सदुपयोग लेखन, समाजसेवा या कुछ अन्य क्षेत्र में करते हैं। और ये मानते हैं कि कला का प्रयोग जहां भी हो, वह तो जीवन को श्रेष्ठ ही बनाता है। लोगों का जीवन भी कला के सामान सुंदर होना चाहिए कठिनाइयां कितनी भी हो मुस्कुराना चाहिए। इस युवा लेखक, रूपेश देवांगन जी को भविष्य के लिए अशेष शुभकामनायें और बहुत बहुत बधाई।
"दस्तक" इनकी पहली किताब है, जो कि एक काव्य संग्रह है और पाठकों से इस किताब को खूब प्रशंसा मिली है, इस किताब के बाद इन्हें एक युवा लेखक के रूप में पहचान मिली, इनकी किताब "दस्तक" को कई अवार्ड भी प्राप्त हुए हैं। कविताओं के बाद कहानी लेखन में "अजनबी" इनका पहला प्रयास है। अपने पेशे के साथ साथ कुछ अलग करने की चाहत इनको हमेशा से रही है, इसलिए आज अपने समय का सदुपयोग करते हूए कई क्षेत्रों में कुछ नया करने की कोशिश में लगे ही रहते हैं। अपने जीवन के इस पथ पर, इनको बहुत सारी कठिनाइयों का सामना भी करना पड़ा है, पर इन्होने कभी हार नही मानी, कभी टूटे नही और कभी रूके भी नही, हर बार ये कठिनाइयों का सामना कर, हौसलो के साथ निरंतर आगे बढ़ते रहे और इन्होने आज अपना एक मुकाम हासिल किया, आज ये युवाओं के एक प्रेरणास्त्रोत हैं, इसलिये इन्हे प्रेरणा मंच के द्वारा प्रेरणा के पुष्प-2019 से नवाजा गया है। ये बचपन से ही उर्जावान, संस्कारी, भावुक और चंचल प्रवृत्ति के हैं, जब भी इन्हे अपने काम के बाद खाली समय मिलता है, तो अपने समय का सदुपयोग लेखन, समाजसेवा या कुछ अन्य क्षेत्र में करते हैं। और ये मानते हैं कि कला का प्रयोग जहां भी हो, वह तो जीवन को श्रेष्ठ ही बनाता है। लोगों का जीवन भी कला के सामान सुंदर होना चाहिए कठिनाइयां कितनी भी हो मुस्कुराना चाहिए। इस युवा लेखक, रूपेश देवांगन जी को भविष्य के लिए अशेष शुभकामनायें और बहुत बहुत बधाई।
Productspecificaties
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