Aur Bhi Kuch Kahna Hai, Kavita Sankalan

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Bol "जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है । आज के समाज में घट रही घटनाओंको कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है । जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, चीन्ता, फिक्र, उलझन, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है । आज के समाज में घट रही घटनाओं को कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।"

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"जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है । आज के समाज में घट रही घटनाओंको कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है । जीवन के साथ साहित्य का अटुट संबंध है । जहाँ तक प्रश्न कविता का है वह तो हमारे अंत: स्थल की वाणी है । प्रस्तुत कविता संग्रह और भी कुछ कहना है..... कवि दीपंकर जेना की सोच, विचार और भावधारा को सब के सामने लाने का उपक्रम है । समकालीन परिदृश्य में तुकबंदी को कुछ लोग कविता मानने लगे हैं, लेकिन यह संग्रह उससे कोसों दूर है । इसमें मानव की पीड़ा, टीस, चीन्ता, फिक्र, उलझन, भोगे हुए यथार्थ को अभिव्यक्ति मिली है । आज के समाज में घट रही घटनाओं को कवि ने प्रतीक और बिंब का सहारा लिए एकदम सामान्य बोलचाल की भाषा में शब्द का जामा पहनाया है । यही इस संग्रह की खूबी है जिससे पुस्तक को हाथ लिए पाठक सारी कविताओं को चाहत भरी नजर से एक ही सांस में पढ़ लेना चाहता है ।"


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  • 9789355359476
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