कुछ एहसास,कुछ लम्हे कैद करने की एक कोशिश-शब्दों में। यह कविता-संग्रह आधुनिक जीवन की उलझनों, बदलती दुनिया, युवाओं की अनकही तन्हाई और माता-पिता के मौन संघर्षों को छूता है। यहाँ सवाल भी है, थकान भी, समय की बेचैनी, शरारत, मुस्कान, उम्मीद और छोटी- छोटी खुशियाँ भी । इन पंक्तियों में जीवन को जैसा है, वैसा ही अपनाने का भाव है- गरिमा, संवेदनशीलता और सकारात्मकता के साथ। इस उम्मीद में कि जैसे मैंने इन्हें जिया है, आप भी महसूस करें और, कुछ कदम मेरे साथ चलें।
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