बोलते अल्फ़ाज़ गुनगुनात&
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कुछ एहसास,कुछ लम्हे कैद करने की एक कोशिश-शब्दों में। यह कविता-संग्रह आधुनिक जीवन की उलझनों, बदलती दुनिया, युवाओं की अनकही तन्हाई और माता-पिता के मौन संघर्षों को छूता है। यहाँ सवाल भी है, थकान भी, समय की बेचैनी, शरारत, मुस्कान, उम्मीद और छोटी- छोटी खुशियाँ भी । इन पंक्तियों में जीवन को जैसा है, वैसा ही अपनाने का भाव है- गरिमा, संवेदनशीलता और सकारात्मकता के साथ। इस उम्मीद में कि जैसे मैंने इन्हें जिया है, आप भी महसूस करें और, कुछ कदम मेरे साथ चलें।
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कुछ एहसास,कुछ लम्हे कैद करने की एक कोशिश-शब्दों में। यह कविता-संग्रह आधुनिक जीवन की उलझनों, बदलती दुनिया, युवाओं की अनकही तन्हाई और माता-पिता के मौन संघर्षों को छूता है। यहाँ सवाल भी है, थकान भी, समय की बेचैनी, शरारत, मुस्कान, उम्मीद और छोटी- छोटी खुशियाँ भी । इन पंक्तियों में जीवन को जैसा है, वैसा ही अपनाने का भाव है- गरिमा, संवेदनशीलता और सकारात्मकता के साथ। इस उम्मीद में कि जैसे मैंने इन्हें जिया है, आप भी महसूस करें और, कुछ कदम मेरे साथ चलें।
कुछ एहसास,कुछ लम्हे कैद करने की एक कोशिश-शब्दों में। यह कविता-संग्रह आधुनिक जीवन की उलझनों, बदलती दुनिया, युवाओं की अनकही तन्हाई और माता-पिता के मौन संघर्षों को छूता है। यहाँ सवाल भी है, थकान भी, समय की बेचैनी, शरारत, मुस्कान, उम्मीद और छोटी- छोटी खुशियाँ भी । इन पंक्तियों में जीवन को जैसा है, वैसा ही अपनाने का भाव है- गरिमा, संवेदनशीलता और सकारात्मकता के साथ। इस उम्मीद में कि जैसे मैंने इन्हें जिया है, आप भी महसूस करें और, कुछ कदम मेरे साथ चलें।
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