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"छत्तीसगढ़ पर्यटन महिमा (काव्य-संग्रह) के बारे में" कवि, लेखक, विचारक एवं प्रशासनिक अधिकारी- साहित्य वाचस्पति डॉ. किशन टण्डन क्रान्ति द्वारा रचित "छत्तीसगढ़ पर्यटन महिमा" काव्य-संग्रह में कुल 141 कविताएँ संग्रहित हैं, जो छत्तीसगढ़ प्रदेश के महत्वपूर्ण पर्यटन केन्द्रों के बारे में सुन्दर चित्रण प्रस्तुत करती है। यह संग्रह काव्यमय अभिव्यक्ति द्वारा पर्यटन प्रेमियों को पर्यटन स्थलों की प्रमुख विशेषताएँ, उनकी भौगोलिक दूरियाँ, उपलब्ध सुविधाएँ इत्यादि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराता है। इस संग्रह में हरे-भरे सघन वन, कल-कल छल-छल करती हुई नदियाँ और झरने, कुलांचे मारते वन्य प्राणियों के झुण्ड, मनमोहक नृत्य-संगीत, मड़ई-मेले, अनेक त्यौहार और पर्व, परम्परा, आस्था और विश्वास के रंग में सने भोले-भाले आदिवासी, आकाश छूती इमारतें तो कहीं फूस की बनी झोपड़ियाँ इत्यादि तमाम इन्द्रधनुषी रंग भरे पड़े हैं। इस संग्रह में 'धान का कटोरा' कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ की खनिज सम्पदा को जहाँ एक ओर दर्शाया गया है; वहीं दूसरी ओर वन सम्पदा का भी मनोहारी चित्रण प्रस्तुत किया गया है। वास्तव में यह संग्रह न केवल पाठकों के अन्तःकरण को गहराई तक स्पर्श करता है, वरन् घर बैठे ही पूरे छत्तीसगढ़ की सैर करा देता है। इसमें वो सब कुछ समाहित है, जो एक पर्यटक को जानना जरूरी होता है। कुल मिलाकर यह एक कालजयी कृति है।
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