Jeev aur Jeevan

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Bol "राम राम, प्रिय,आदरणीय पाठक गण, 'जीव और जीवन' को लेखक का लिखने का मूल उद्देश्य समाज में फैली कुरीतियां ब दिन प्रतिदिन धर्म के नाम पर बढ़ता अंधविश्वास, और सामाजिक वैमनस्यता और बढ़ती जाती जात-पात की कट्टरता, के ऊपर एक सद प्रहार है, धर्म जीवन में जरूरी है पर कितना ? जितना कि मनुष्य के लिए जीने के लिए भोजन की जरूरत है, बस इतना, अधिकता चाहे धार्मिक हो, सामाजिक हो,य फिर राजनैतिक इनकी वेमेल व अंध एकता ,जब वह मर्यादा विहीन हो जाती है, तो सभी समाज के लिए घातक होती है,इसी तरह से सनातन धर्म के सद ग्रंथों के प्रसंग ब समाज में फैली उनकी कहानियां व कथाएं मेल नहीं खाती लोग बाग तोड़ मरोड़ कर उन्हें पेश कर देते जो कि एक गलत परंपरा है लेखक ने अपने अनुभव व विश्वास से उन पर सात्विक प्रकाश डालने की कोशिश की है और एक सद प्रयास मात्र है । जय राम जी की"

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"राम राम, प्रिय,आदरणीय पाठक गण, 'जीव और जीवन' को लेखक का लिखने का मूल उद्देश्य समाज में फैली कुरीतियां ब दिन प्रतिदिन धर्म के नाम पर बढ़ता अंधविश्वास, और सामाजिक वैमनस्यता और बढ़ती जाती जात-पात की कट्टरता, के ऊपर एक सद प्रहार है, धर्म जीवन में जरूरी है पर कितना ? जितना कि मनुष्य के लिए जीने के लिए भोजन की जरूरत है, बस इतना, अधिकता चाहे धार्मिक हो, सामाजिक हो,य फिर राजनैतिक इनकी वेमेल व अंध एकता ,जब वह मर्यादा विहीन हो जाती है, तो सभी समाज के लिए घातक होती है,इसी तरह से सनातन धर्म के सद ग्रंथों के प्रसंग ब समाज में फैली उनकी कहानियां व कथाएं मेल नहीं खाती लोग बाग तोड़ मरोड़ कर उन्हें पेश कर देते जो कि एक गलत परंपरा है लेखक ने अपने अनुभव व विश्वास से उन पर सात्विक प्रकाश डालने की कोशिश की है और एक सद प्रयास मात्र है । जय राम जी की"


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  • 9789355354655
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