कभी ऐसा लगता है कि बहुत कुछ कहना है, पर लफ़्ज़ साथ नहीं देते। कुछ एहसास दिल में कहीं रह जाते हैं - यादों में, ख़ामोशी में, या किसी शाम की चाय में। ये किताब ऐसे ही जज़्बातों का एक सफ़र है - जो दिल से निकले हैं, और दिल तक पहुँचने की चाह रखते हैं। हर नज़्म, हर कविता, एक कोशिश है उन बातों को कहने की - जो पहले भी कही गई हों, लेकिन शायद इस तरह नहीं। अगर आपने कभी ख़ुद में कुछ खोया है, या अल्फ़ाज़ में अपना अक्स ढूंढा है - तो हो सकता है ये किताब आपके लिए ही लिखी गई हो।
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