"कला - सृष्टि का छठा तत्व" 27 कविताओं का अद्वितीय संकलन है, जहाँ कला को जीवन, स्मृति, ऊर्जा, मौन, मृत्यु और शून्य के आयामों में खोजा गया है। यह पुस्तक बताती है कि कला पाँच महाभूतों से परे, चेतना का छठा और अनिवार्य तत्व है-जो मनुष्य को सृजनशील बनाता है। पहली कविताएँ अनुभव, संवेदना और रूप के स्तर पर चलती हैं, जबकि अंतिम पाँच पंचकोश - पाँच महाग्रंथ की तरह कला को प्रेम से लेकर अनहद तक पूर्ण यात्रा प्रदान करती हैं। यह रचना पाठक को सोचने नहीं-अनुभव करने के लिए आमंत्रित करती है।
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