मानव सभ्यता के आरंभ से ही नारी बहुआयामी और कुशल मल्टीटास्कर रही है। युगों-युगों से उसने अपनी अद्भुत क्षमता, सहजता और दक्षता से एक साथ अनेक जिम्मेदारियाँ निभाई हैं। इस पुस्तक की कविताएँ प्राचीन काल से आधुनिक युग तक नारी के विविध रूपों, उसके संघर्ष, त्याग, सामर्थ्य और दैनिक जीवन में उसकी महत्वपूर्ण भूमिकाओं का सजीव चित्रण करती हैं। ये रचनाएँ नारीत्व के अनेक आयामों का उत्सव मनाते हुए परिवार, समाज और सभ्यता में उसके अमूल्य योगदान को सम्मानपूर्वक समर्पित हैं।
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