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मुझे बहुत खुशी हो रही है कि मेरा प्रथम काव्य संकलन ‘मन के झरोखे से’ प्रकाशित हो रहा है । मैं अपने माता –पिता, गुरुजनों और मित्रों का दिल से आभार व्यक्त करता हूँ । इन सबकी प्रेरणा से ही मैं यह काव्य संकलन प्रकाशित करवा पा रहा हूँ । इस काव्य संकलन को छपवाने में जहाँ मेरे माता- पिता, गुरुजनों और मेरे मित्रों का योगदान है वहीं अर्धांगिनी संतोष, पुत्र शुभम कुमार और सिध्दार्थ कुमार (सिध्दू किरमच) का भी विशेष योगदान है इनके सहयोग के बिना यह संकलन छपना मुश्किल था इनका भी मैं दिल से आभार व्यक्त करता हूँ । इस काव्य संकलन को टाइप करने में श्री राज कुमार जी का भी अहम् योगदान रहा है । बचपन से ही मित्रों में बैठकर तुकबंदी करना, अपने मित्रों को हँसाना मेरी आदत रही है । यही आदत धीरे –धीरे सही दिशा में बढ़ने लगी । पहले मैं कभी कभी रचनाएँ लिखने लगा और फिर अपने दोस्तों में या मंच पर सुनाने लगा । मुझे श्रोताओं का स्नेह मिलने लगा और मैंने लिखने की गति को कुछ तेज कर दिया । सन् 1990 से मैं निरंतर पंक्तियाँ गढ़ रहा हूँ । मेरे प्रिय गाँव किरमच में रामफल बूरा जी और बहुत से साथियों का एक ग्रुप है, उन सबकी प्रेरणा व प्यार मुझे निरंतर मिलता रहता है ।
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