मनोरथ यथास्वरूप मेरे लिए कोई उपदेश नहीं, बल्कि आत्म-संवाद की एक यात्रा है। इस काव्य-संग्रह में मैंने मन, चेतना और तत्व के उन आयामों को छूने का प्रयास किया है, जहाँ प्रश्न उत्तरों से अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं। प्रत्येक काव्य मेरे लिए एक पड़ाव है-जहाँ मैं ठहरता भी हूँ और आगे बढ़ता भी हूँ। यह पुस्तक मैंने उन पाठकों के लिए लिखी है जो सोचते हैं, प्रश्न करते हैं और अपनी आंतरिक यात्रा को अभी समाप्त नहीं मानते।
Prijshistorie
* Prijshistorie bevat geen data van Amazon.
Prijzen voor het laatst bijgewerkt op: