पुरुष-प्रकृति एवं भक्ति - चेतना की अनंत काव्य-यात्राविचार, कथा और कविता के माध्यम से चेतना को समझने का एक विनम्र प्रयास है।इन कविताओं में पुरुष-प्रकृति, ज्ञान, भक्ति, प्रेम और आत्म-बोध के विविध आयाम अलग-अलग कथाओं और प्रतीकों के माध्यम से उभरते हैं। कृष्ण-राधा, मीरा, उपनिषदों के प्रसंग और पौराणिक आख्यान यहाँ केवल कथाएँ नहीं, बल्कि भीतर की यात्रा के प्रतीक हैं।यह पुस्तक किसी दर्शन को समझाने का दावा नहीं करती। यह उन प्रश्नों के साथ चलने का एक निमंत्रण है, जो मनुष्य को स्वयं के भीतर ले जाते हैं।
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