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‘पराजित नहीं हूँ मैं’ की संकलित अधिकांश कविताऐं 1960 के दशक की, कुछ कविताएं 50 के उत्तरार्ध की तथा कुछ कविताएं 70 के दशक में घोषित आपातकाल का ताप झेलते हुए यथासमय लिखी गयी थीं। पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से ये रचनाएं पाठकों तक पहुँची पर विभिन्न कारणों से पांडुलिपि तैयार न कर पाने के कारण संकलन के रूप में प्रकाशित नहीं हो सकी। अभी भी नहीं हो पाती अगर इस कार्य में अपने प्रिय परिवारजनों का सहयोग न मिला होता। जहाँ तक कविताओं का प्रश्न है सुधि पाठक स्वयं तय करें कि कैसी हैं।
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‘पराजित नहीं हूँ मैं’ की संकलित अधिकांश कविताऐं 1960 के दशक की, कुछ कविताएं 50 के उत्तरार्ध की तथा कुछ कविताएं 70 के दशक में घोषित आपातकाल का ताप झेलते हुए यथासमय लिखी गयी थीं। पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से ये रचनाएं पाठकों तक पहुँची पर विभिन्न कारणों से पांडुलिपि तैयार न कर पाने के कारण संकलन के रूप में प्रकाशित नहीं हो सकी। अभी भी नहीं हो पाती अगर इस कार्य में अपने प्रिय परिवारजनों का सहयोग न मिला होता। जहाँ तक कविताओं का प्रश्न है सुधि पाठक स्वयं तय करें कि कैसी हैं।
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‘पराजित नहीं हूँ मैं’ की संकलित अधिकांश कविताऐं 1960 के दशक की, कुछ कविताएं 50 के उत्तरार्ध की तथा कुछ कविताएं 70 के दशक में घोषित आपातकाल का ताप झेलते हुए यथासमय लिखी गयी थीं। पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से ये रचनाएं पाठकों तक पहुँची पर विभिन्न कारणों से पांडुलिपि तैयार न कर पाने के कारण संकलन के रूप में प्रकाशित नहीं हो सकी। अभी भी नहीं हो पाती अगर इस कार्य में अपने प्रिय परिवारजनों का सहयोग न मिला होता। जहाँ तक कविताओं का प्रश्न है सुधि पाठक स्वयं तय करें कि कैसी हैं।
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