Potery collection 452 (Edition1)
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शुक्रिया ज़िंदगी रचनाशीलता की अजब यात्रा रही, खुद में खोये हुए सारा संसार देख लिया. 21 दिनों के इस सफ़र का आगाज हुआ बुकलीफ की इस अनोखी पहल के साथ, जहाँ बस एक कवि और उसकी कविताओं का साथ था, बस जज़्बातों और लफ्ज़ों का मेल था. इन तीन हफ्तों में अपनी पूरी ज़िंदगी टटोल ली हमने. क्या खोया, क्या पाया और क्या समेट लिया यादों के दामन में. कुछ मीठे, कुछ खट्टे तो कुछ कड़वे एहसास, मगर इनमें से किसी के बिना ये उम्र अधूरी सी लगती है. आशा है, हमारी इस यात्रा का मज़ा पढ़ने वाले सभी दोस्त भी खूब उठायेंगे.
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शुक्रिया ज़िंदगी रचनाशीलता की अजब यात्रा रही, खुद में खोये हुए सारा संसार देख लिया. 21 दिनों के इस सफ़र का आगाज हुआ बुकलीफ की इस अनोखी पहल के साथ, जहाँ बस एक कवि और उसकी कविताओं का साथ था, बस जज़्बातों और लफ्ज़ों का मेल था. इन तीन हफ्तों में अपनी पूरी ज़िंदगी टटोल ली हमने. क्या खोया, क्या पाया और क्या समेट लिया यादों के दामन में. कुछ मीठे, कुछ खट्टे तो कुछ कड़वे एहसास, मगर इनमें से किसी के बिना ये उम्र अधूरी सी लगती है. आशा है, हमारी इस यात्रा का मज़ा पढ़ने वाले सभी दोस्त भी खूब उठायेंगे.
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शुक्रिया ज़िंदगी रचनाशीलता की अजब यात्रा रही, खुद में खोये हुए सारा संसार देख लिया. 21 दिनों के इस सफ़र का आगाज हुआ बुकलीफ की इस अनोखी पहल के साथ, जहाँ बस एक कवि और उसकी कविताओं का साथ था, बस जज़्बातों और लफ्ज़ों का मेल था. इन तीन हफ्तों में अपनी पूरी ज़िंदगी टटोल ली हमने. क्या खोया, क्या पाया और क्या समेट लिया यादों के दामन में. कुछ मीठे, कुछ खट्टे तो कुछ कड़वे एहसास, मगर इनमें से किसी के बिना ये उम्र अधूरी सी लगती है. आशा है, हमारी इस यात्रा का मज़ा पढ़ने वाले सभी दोस्त भी खूब उठायेंगे.
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