Pratinidhi Kahaniyan : Uday Prakash
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उदय प्रकाश पिछले कई दशकों से हिन्दी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले कहानीकार रहे हैं। हिन्दी कहानी के फ़ॉर्म को आमूल बदलते हुए उन्होंने नई तरह की पठनीयता का आविष्कार किया जिसमें यथार्थ का पुनर्घटन अपने बहुत नज़दीक होता प्रतीत होता है। आप उन्हें पढ़ते हुए उनमें विचरते भी हैं। वे आपके सामने घटित होती प्रतीत होती हैं। आज वे अकेले ऐसे कहानीकार हैं जिनकी लगभग हर नयी कथा-रचना को एक साहित्यिक परिघटना की तरह देखा जाता है, जिनकी हर कहानी अक्सर सुदीर्घ बहसों को जन्म देती है और वर्तमान कथा-चेतना को एक नई दिशा भी। उनकी कहानी सिर्फ़ उन पात्रों की नहीं होती जिनके नाम हमें वहाँ पढ़ने को मिलते हैं, वह पूरे समाज, पूरी सभ्यता, अपने समूचे समय की कहानी होती है। उदय प्रकाश की कला के जानकार प्रखर आलोचक संजीव कुमार द्वारा किए गए इस प्रतिनिधि चयन में उनकी कुछ लम्बी और कुछ छोटी कहानियों को रखा गया है, ताकि पाठक उदय प्रकाश के विराट और सूक्ष्म, दोनों से परिचित हो सके।
उदय प्रकाश पिछले कई दशकों से हिन्दी के सर्वाधिक पढ़े जाने वाले कहानीकार रहे हैं। हिन्दी कहानी के फ़ॉर्म को आमूल बदलते हुए उन्होंने नई तरह की पठनीयता का आविष्कार किया जिसमें यथार्थ का पुनर्घटन अपने बहुत नज़दीक होता प्रतीत होता है। आप उन्हें पढ़ते हुए उनमें विचरते भी हैं। वे आपके सामने घटित होती प्रतीत होती हैं। आज वे अकेले ऐसे कहानीकार हैं जिनकी लगभग हर नयी कथा-रचना को एक साहित्यिक परिघटना की तरह देखा जाता है, जिनकी हर कहानी अक्सर सुदीर्घ बहसों को जन्म देती है और वर्तमान कथा-चेतना को एक नई दिशा भी। उनकी कहानी सिर्फ़ उन पात्रों की नहीं होती जिनके नाम हमें वहाँ पढ़ने को मिलते हैं, वह पूरे समाज, पूरी सभ्यता, अपने समूचे समय की कहानी होती है। उदय प्रकाश की कला के जानकार प्रखर आलोचक संजीव कुमार द्वारा किए गए इस प्रतिनिधि चयन में उनकी कुछ लम्बी और कुछ छोटी कहानियों को रखा गया है, ताकि पाठक उदय प्रकाश के विराट और सूक्ष्म, दोनों से परिचित हो सके।
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