Vergelijk aanbieders (1)
प्यार जब जीवन और कविता, दोनों जगह दुर्लभ हो रहा हो, दोनों ही जगह जब समाज और व्यवस्था में उग रहीं विषैली, प्रेमविरोधी और हिंस्र प्रतिक्रियाएँ मुख्यधारा हो रही हों, तब 'प्यार करता हुआ कोई एक' भी बड़ी राहत, और गहरी आश्वस्ति का स्रोत मालूम होता है। यह कविता-संग्रह उन प्रेमियों के लिए है जिनसे जाने-अनजाने उनका प्रेम खो गया है; और दुखद यह है कि आज के समय में जीनेवाले हम सभी उसी श्रेणी में आते हैं। कभी हम उसे समझ नहीं पाते, कभी उसे सँभाल नहीं पाते क्योंकि हम सिर्फ़ 'प्रेम में होकर' बने रह सकें, इस विकल्प को ही कर सकनेवालों ने असम्भव कर दिया है। इसलिए ये कविताएँ हम सबके लिए हैं। ये प्रेम की उस खाली जगह से उद्भूत हुई हैं जहाँ से अभी-अभी उठकर कोई गया है, जहाँ अभाव से भरी हुई एक कुर्सी अभी भी रखी है, हिल रही है, लेकिन उसे छूते हुए हमारे हाथ काँपते हैं, जिसे देखकर हमें हमारी अपात्रता याद आती है। बीती हुई नजदीकियों के चमकीले कणों से दमकती ये कविताएँ विछोह के असीम पठार पर प्रेम के सबसे गहन सत्य की खोज में भटकती हुई हमें प्रेम की कीमत समझाती हैं। बताती हैं कि जब वह होता है तब भी, और जब नहीं होता तब भी, वह अमूल्य है, वह हर रूप में हमें ज्यादा मानवीय और ज्यादा सम्भावनाशील बनाता है। और यह कि, उसके 'होने' और 'न होने' से परे का प्रेमच्युत संसार कुछ भी नहीं है। 'मुझसे लिपटती है मेरी जान/वो मुझे खाती है मैं उसे/मैं उसकी बाँहों में मजे से मर जाता हूँ।' ये कविताएँ हमें कोंचकर पूछती हैं कि 'मजे से मरे' हुए हमें कितनी सदियाँ बीत गई हैं; कि कितना वक्त हो गया है हमें किसी की तलाश में भटककर खुद से जा मिले हुए। ये कविताएँ प्रेम के अभाव में जीने के हमारे अभ्यास को तोड़ती हैं; वियोग की अलग-अलग कन्दराओं से आहों की तरह निकली ये पंक्तियाँ हमें पुन: प्रेम की अबूझ दुनिया में जाने को उकसाती हैं।
Productspecificaties
| EAN |
|
|---|---|
| Maat |
|
Prijshistorie
Prijzen voor het laatst bijgewerkt op: