Sabase Bada Sawal

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Bol हरिशंकर परसाई की कई कहानियों का मंचन विभिन्न रंग-मंडलियाँ और निर्देशक करते रहे हैं। नाटकीयता उनकी कहानियों के प्रमुख तत्त्वों में से एक है जिसके चलते वे आसानी से बेहतरीन नाट्य-प्रस्तुतियों में ढल जाती हैं। लेकिन ‘सबसे बड़ा सवाल’ नाटक ही है, और सम्भवत: परसाई जी की एकमात्र नाट्य-रचना। दृश्य-योजना, पात्रों की संकल्पना, परिस्थितियों के ‘कंस्ट्रास्ट’ और दृश्यों के कम्पोजीशन में यह नाटक श्रेष्ठ नाटकों की कोटि में ठहरता है जिसे पढ़ना जितना दिलचस्प है, मंच पर देखना उससे भी ज्यादा उत्तेजक होगा। नाटक की कथावस्तु राजनीतिक है, और पृष्ठभूमि है एक चुनाव की जिसमें चार पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं—काली पार्टी, सफेद पार्टी, पीली पार्टी और विजय पार्टी। सुसंगत दृश्यों, संवादों और समाज व राजनीति के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले पात्रों के माध्यम से यह नाटक भ्रष्टाचार, राजनेताओं के पाखंड और आम जनता के भीड़ में बदल जाने की प्रवृत्ति के साथ-साथ युवा वर्ग की दिशाहीन समझौतापरस्ती को भी उजागर करता है। नाटक में कई मोड़ ऐसे भी आते हैं जहाँ से हमें अपना वर्तमान झाँकता दिखाई देता है।

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हरिशंकर परसाई की कई कहानियों का मंचन विभिन्न रंग-मंडलियाँ और निर्देशक करते रहे हैं। नाटकीयता उनकी कहानियों के प्रमुख तत्त्वों में से एक है जिसके चलते वे आसानी से बेहतरीन नाट्य-प्रस्तुतियों में ढल जाती हैं। लेकिन ‘सबसे बड़ा सवाल’ नाटक ही है, और सम्भवत: परसाई जी की एकमात्र नाट्य-रचना। दृश्य-योजना, पात्रों की संकल्पना, परिस्थितियों के ‘कंस्ट्रास्ट’ और दृश्यों के कम्पोजीशन में यह नाटक श्रेष्ठ नाटकों की कोटि में ठहरता है जिसे पढ़ना जितना दिलचस्प है, मंच पर देखना उससे भी ज्यादा उत्तेजक होगा। नाटक की कथावस्तु राजनीतिक है, और पृष्ठभूमि है एक चुनाव की जिसमें चार पार्टियाँ हिस्सा ले रही हैं—काली पार्टी, सफेद पार्टी, पीली पार्टी और विजय पार्टी। सुसंगत दृश्यों, संवादों और समाज व राजनीति के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधित्व करने वाले पात्रों के माध्यम से यह नाटक भ्रष्टाचार, राजनेताओं के पाखंड और आम जनता के भीड़ में बदल जाने की प्रवृत्ति के साथ-साथ युवा वर्ग की दिशाहीन समझौतापरस्ती को भी उजागर करता है। नाटक में कई मोड़ ऐसे भी आते हैं जहाँ से हमें अपना वर्तमान झाँकता दिखाई देता है।


Productspecificaties

Merk Rajkamal Prakashan
EAN
  • 9789360864897
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