समाज का आईना "स्त्री, और इंसानियत की अनक&

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Bol यह पुस्तक "समाज का आईना" समाज की उन सच्चाइयों को उजागर करती है, जिन्हें हम अक्सर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। इसमें स्त्री, समाज और इंसानियत के गहरे पहलुओं को कविताओं के माध्यम से व्यक्त किया गया है। हर कविता एक सवाल उठाती है - हमारे सोचने, समझने और महसूस करने के तरीके पर। यह संग्रह केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि एक जागरूकता की पुकार है - जो पाठक के दिल को झकझोर कर सोचने पर मजबूर कर देगी।

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Pagina's: 58, Paperback, Bookleaf Publishing


Productspecificaties

Merk BookLeaf Publishing
EAN
  • 9798900819600
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