यह पुस्तक शिवसूत्र पर आधारित एक समकालीन और अनुभव-प्रधान व्याख्या है, जो कश्मीर शैव दर्शन को आधुनिक जीवन के प्रश्नों से जोड़ती है। लेखक ने इसे न तो शास्त्रीय जटिलता में बाँधा है, न ही धार्मिक उपदेश के रूप में प्रस्तुत किया है, बल्कि चेतना, मन और दैनिक अनुभव की भाषा में रखा है। आणवोपाय, शक्तोपाय और सम्भोपाय के माध्यम से यह पुस्तक आधुनिक मनुष्य की चिन्ता, थकान, पहचान-भ्रम और आन्तरिक असंतुलन को संबोधित करती है। यह उन पाठकों के लिए उपयुक्त है जो दर्शन को सिर्फ पढ़ना नहीं, समझना और जीना चाहते हैं।
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