यह संकलन निष्प्रभ द्वारा अपने छात्र जीवन और छात्रावास के दिनों में लिखी गई कविताओं का संग्रह है-वे वर्ष जब संवेदनाएँ तीव्र थीं, प्रश्न गहरे थे और जीवन अपने अर्थ तलाश रहा था। इन रचनाओं में एक युवा मन का आत्मसंवाद है-संघर्ष, आशा, एकांत, प्रेम और जीवन-दर्शन की झलकियों के साथ। "शब्दों में बसे तुम" इस विश्वास का प्रतीक है कि समय भले बीत जाए, पर व्यक्ति अपने शब्दों में जीवित रहता है।
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