“साहित्य को जीने की शक्ति देनेवाला माननेवाले गीत चतुर्वेदी का गद्य कई विधाओं को समेटता है : उसमें साहित्य, संगीत, कविता, कथा आदि पर विचार रखते हुए एक तरह का बौद्धिक वैभव और संवेदनात्मक लालित्य बहुत घने गुँथे हुए प्रकट होते हैं। उनमें पढ़ने, सोचने, सुनने-गुनने आदि सभी का सहज पर विकल विन्यास भी बहुत संश्लिष्ट होता है। एक लेखक के रूप में गीत की रुचि और आस्वादन का वितान काफ़ी फैला हुआ है। लेकिन उनमें इस बात का जतन बराबर है कि यह विविधता बिखर न जाए। उसे संयमित करने और फिर भी उसकी स्वाभाविक ऊर्जा को सजल रखने का हुनर उन्हें आता है।” —अशोक वाजपेयी
AmazonPagina's: 368, Hardcover, Rajkamal Prakashan Pvt. Ltd
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