"शब्दों की परछाइयाँ 'मेरा पहला कविता-संग्रह हैl हमारे सामने अनिश्चय और दुविधा का धुंध है, बुराइयों की भीड़ है, तथापि कुछ अच्छाइयाँ भी हैं जिनको बचाकर रखना भी हमारी जिम्मेदारी है l साहित्यकार होने के नाते अच्छाइयों और बुराइयों पर हमारी न्यायपरक समीक्षक दृष्टि होनी चाहिए l केवल प्रतिरोधी विचारों को परोसने से काम नहीं चलेगा l जो अच्छा और प्रांजल है, उसे पुरस्कृत भी करना होगा l उसे भी प्रकाश में लाना होगा l कविता संग्रह 'शब्दों की परछाईयाँ 'में मानवीय संवेदनाओं, चारित्रिक पतन, प्राकृतिक घटनाओं, परिघटनाओं और आचरणगत परिवर्तन की कविताएं प्रमुखता से उद्धृत हैं l मानवीय चिंतायें, नारियों का शोषण, अतिवाद, भ्र्ष्टाचार और महंगाई एवं बेकारी से पीड़ित आत्मा का चित्कार, मनुष्यों का विभिन्न वर्गों में विभाजन, अभावग्रस्त मनःस्थितियाँ और संघर्ष की जिजीविषा को कविताओं में सामने लाने का प्रयास किया गया है l -रामफल तिवारी"
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